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[राजाराज प्रथम की सफलताएं](https://inhindiworld.com/rajaraj-pratham-ki-saphalataen-in-hindi/): राजराज प्रथम की सफलताएं -Achievements of Rajaraja I   राजराज प्रथम की मुख्य विशेषताओं  राजराज प्रथम चोल वंश का सर्वाधिक शक्तिशाली तथा महान् शासक था । उसने 985 ई ० से - [ चोल वंश का विकास एवं पतन](https://inhindiworld.com/chol-vansh-ka-vikas-aur-patan-kese-hua-in-hindi/):  चोल वंश का विकास एवं पतन -Rise , Growth and Downfall of the Cholas- चोल वंश- Chola Dynasty- दक्षिण में चोल शक्ति के उत्थान एवं विकास के सम्बन्ध में संक्षिप्त - [सातवाहन काल की सामाजिक , आर्थिक , धार्मिक दशा , कला तथा साहित्य का वर्णन](https://inhindiworld.com/satavahan-kal-ki-samajik-aarthik-dharmik-dasha-kala-tatha-sahity-ka-varnan-in-hindi/): सातवाहन काल की सामाजिक , आर्थिक , धार्मिक दशा , कला तथा साहित्य का वर्णन  -Give a brief account of the social , economic , religious conditions , art and - [सातवाहन कौन थे](https://inhindiworld.com/satavahan-kaun-the-in-hindi/): सातवाहन कौन थे -Who were the Satavahanas  सातवाहन कौन थे- सातवाहन कौन थे ? इसके सम्बन्ध में इतिहासकारों में मतभेद हैं । इनका सम्बन्ध आन्ध्र वंश की एक जाति से - 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[अशोक तथा बौद्ध धर्म](https://inhindiworld.com/ashok-aur-baudh-dharm-in-hindi/): अशोक तथा बौद्ध धर्म -Ashoka and Buddhism अशोक भारतीय इतिहास में बौद्ध धर्म के प्रचारक के रूप में विख्यात है । वह कलिंग युद्ध के पश्चात् बौद्ध धर्म का अनुयायी - [अशोक का धम्म](https://inhindiworld.com/ashok-ka-dham-in-hindi/): अशोक का धम्म -Ashoka’s Dhamma  अशोक के धम्म से क्या अभिप्राय है अशोक का नाम सम्पूर्ण विश्व इतिहास में उसके द्वारा चलाए गए ‘ धम्म ‘ अथवा ‘ धर्म ‘ - [अशोक का शासन प्रबन्ध](https://inhindiworld.com/ashok-ka-shasan-prabandh-kesa-tha-in-hindi/): अशोक का शासन प्रबन्ध -Ashoka’s Administration अशोक के शासन प्रबन्ध का आधार उसके दादा चन्द्रगुप्त मौर्य की शासन प्रणाली थी । परन्तु कलिंग युद्ध के कारण अशोक के व्यक्तिगत तथा - [कलिंग का युद्ध](https://inhindiworld.com/kaling-ka-yudh-kab-hua-in-hindi/): कलिंग का युद्ध-The Kalinga War अशोक की कलिंग विजय  कलिंग विजय-Conquest of Kalinga– अपने शासन के आरम्भिक वर्षों में अशोक अपने राज्य का विस्तार करना चाहता था । इसलिए उसने - [अशोक का जीवन परिचय](https://inhindiworld.com/ashok-ka-jeevan-parichaya-in-hindi/): अशोक का जीवन परिचय-Ashoka’s biography  अशोक के जीवन का वर्णन  अशोक की गणना न केवल भारत अपितु विश्व के महान् सम्राटों में की जाती है । उसकी तुलना प्रायः रोमन - 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[सिकन्दर के आक्रमण के समय भारत की राजनीतिक दशा](https://inhindiworld.com/sikandar-ke-aakraman-ke-samay-bharat-ki-rajanitik-dasha-kesi-thi-in-hindi/): भारत की राजनीतिक दशा ( Political Condition of IndiA सिकन्दर के आक्रमण के समय भारत की राजनीतिक दशा- 326  ई ० पू ० में सिकन्दर के आक्रमण के समय भारत - [सिकन्दर का भारत पर आक्रमण](https://inhindiworld.com/sikandar-ka-bharat-par-akraman-in-hindi/): सिकन्दर का भारत पर आक्रमण-Alexander’s Invasion of India सिकन्दर ने 326 ई ० पू ० भारत पर आक्रमण किया था । इस आक्रमण के लिए सिकन्दर को अनेक कारणों ने - [अकमेनियन आक्रमण और उनका प्रभाव](https://inhindiworld.com/akameniyan-ka-akraman-aur-unaka-prabhav-in-hindi/):  विदेशी आक्रमण -FOREIGN INVASION अकमेनियन आक्रमण तथा उनका प्रभाव – Achamenian Invasion and Their Impact-  छठी शताब्दी ई ० पू ० में भारत का उत्तर – पश्चिमी क्षेत्र छोटे – - [बौद्ध धर्म और जैन धर्म की तुलना](https://inhindiworld.com/baudh-dharm-aur-jain-dharm-ki-tulana-in-hindi/):  बौद्ध धर्म और जैन धर्म की तुलना-Compare and contrast Buddhism and Jainism- धार्मिक ग्रंथों में अंतर-बौद्ध धर्म तथा जैन धर्म का जन्म समान वातावरण में हुआ । दोनों धर्म हिन्दू - 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Puri Jankari Hindi Mein 2026 Guide Introduction अगर आप शेयर मार्केट में निवेश करना चाहते हैं, ट्रेडिंग शुरू करना चाहते हैं या स्टॉक मार्केट को गहराई से समझना चाहते हैं, तो NSE और BSE के बारे में जानना बेहद जरूरी है। भारत का पूरा शेयर बाजार मुख्य रूप से इन्हीं दो बड़े स्टॉक एक्सचेंजों पर आधारित है। बहुत से नए निवेशकों के मन में सवाल होता है कि NSE क्या है, BSE क्या है, दोनों में अंतर क्या है, कौन बेहतर है और निवेश के लिए किसे चुनना चाहिए? इस लेख में हम NSE और […] - [Share Market Kaise Kaam Karta Hai Beginner Guide 2026](https://inhindiworld.com/share-market-kaise-kaam-karta-hai-beginner-guide-2026/): Share Market Kaise Kaam Karta Hai Beginner Guide 2026 शेयर मार्केट का नाम तो लगभग हर व्यक्ति ने सुना है, लेकिन बहुत से लोगों के मन में यह सवाल रहता है कि आखिर शेयर मार्केट काम कैसे करता है? लोग शेयर खरीदते और बेचते कैसे हैं? शेयर की कीमतें ऊपर-नीचे क्यों होती हैं? और इसमें पैसा कैसे कमाया जाता है? यदि आप शेयर बाजार में नए हैं, तो यह लेख आपके लिए है। यहां हम सरल भाषा में समझेंगे कि शेयर मार्केट कैसे काम करता है, इसके पीछे कौन-कौन से लोग और संस्थाएं होती हैं, और निवेशक इसमें किस प्रकार भाग […] - [Investment vs Trading: Kya Antar Hai Beginner Guide 2026](https://inhindiworld.com/investment-vs-trading-kya-antar-hai-beginner-guide-2026/): Investment vs Trading: Kya Antar Hai Beginner Guide 2026 शेयर बाजार में कदम रखने वाले ज्यादातर लोगों के मन में सबसे पहला सवाल यही होता है कि निवेश (Investment) और ट्रेडिंग (Trading) में क्या अंतर है? बहुत से लोग इन दोनों को एक ही समझ लेते हैं, जबकि वास्तव में इनका उद्देश्य, समय अवधि, जोखिम और पैसा कमाने का तरीका पूरी तरह अलग होता है। अगर आप शेयर बाजार में नए हैं और यह समझना चाहते हैं कि आपके लिए निवेश बेहतर है या ट्रेडिंग, तो यह लेख आपके लिए है। इस लेख में हम निवेश और ट्रेडिंग के बीच के […] - [Trading Kya Hai ? 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Share Market Beginners Guide (2026) आज के समय में ट्रेडिंग का नाम लगभग हर व्यक्ति ने सुना होगा। सोशल मीडिया, यूट्यूब और इंटरनेट पर लोग ट्रेडिंग से पैसे कमाने की बातें करते हैं। लेकिन बहुत से लोगों के मन में सवाल होता है कि ट्रेडिंग आखिर होती क्या है, यह कैसे काम करती है और इससे कमाई कैसे होती है? इस लेख में हम ट्रेडिंग के बारे में पूरी जानकारी सरल भाषा में समझेंगे। ट्रेडिंग क्या होती है ? ट्रेडिंग का मतलब किसी वित्तीय संपत्ति (Asset) को कम समय के लिए खरीदना और उसे लाभ कमाने के […] - [Trading Kya Hoti Hai | ZeroTo Hero Trading Course](https://inhindiworld.com/trading-kya-hoti-hai-zero-to-hero-trading-course/): Trading Kya Hoti Hai ? | Zero To Hero Trading Course स्वागत है “zero To Hero Trading Course” में 🚀 Trading Kya Hoti Hai? | Zero To Hero Trading Course- अगर आप ट्रेडिंग सीखना चाहते हैं लेकिन समझ नहीं पा रहे कि शुरुआत कहाँ से करें, तो यह पूरा Trading Course आपके लिए बनाया गया है। इस सीरीज़ में हम आपको बिल्कुल Beginner से लेकर Professional Trader बनने तक का पूरा सफर आसान भाषा में सिखाएंगे। चाहे आपने कभी शेयर मार्केट में निवेश न किया हो, फिर भी इस कोर्स को पढ़कर आप ट्रेडिंग की मजबूत नींव बना पाएंगे। इस पूरी […] - [Google AI Overview में Website Rank कैसे करें 2026 SEO Guide](https://inhindiworld.com/google-ai-overview-me-website-rank-kese-kre-2026-seo-guide/): Google AI Overview me Website Rank kese kare (2026 SEO Guide) लेखक: InHindiWorld Team अपडेट: जून 2026 Google Search तेजी से बदल रहा है। पहले केवल Google के पहले पेज पर आना ही SEO की सफलता माना जाता था, लेकिन अब लक्ष्य बदल चुका है। आज का सवाल है: “Google AI Overview के अंदर अपनी वेबसाइट का लिंक कैसे दिखाएं?” यही 2026 का SEO Game है। Google ने भी साफ कहा है कि AI Overviews के लिए अलग SEO नहीं, बल्कि बेहतर SEO + Helpful Content + Technical Optimization जरूरी है। Google AI Overview क्या है? AI Overview Google का AI […] - [भारत के 10 अद्भुत मंदिर जो आपको ज़रूर देखने चाहिए](https://inhindiworld.com/indias-10-most-amazing-temples-you-must-visit/): भारत के 10 अद्भुत मंदिर जो आपको ज़रूर देखने चाहिए | (India’s 10 Most Amazing Temples You Must Visit) भारत के 10 अद्भुत मंदिर जो आपको ज़रूर देखने चाहिए- भारत अपने रहस्यमयी और सुंदर मंदिरों के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। यहाँ जानिए भारत के 10 सबसे अद्भुत मंदिरों के बारे में, जहाँ वास्तुकला, आस्था और इतिहास एक साथ मिलते हैं। काशी विश्वनाथ मंदिर (वाराणसी, उत्तर प्रदेश) स्थान: वाराणसी, उत्तर प्रदेश देवता: भगवान शिव खुलने का समय: सुबह 3:00 बजे से रात 11:00 बजे तक Best Time to Visit: नवंबर से फरवरी (ठंड का मौसम और कम भीड़) Travel Tip: गंगा आरती (शाम 6:30 बजे) […] - [डिजिटल मार्केटिंग क्या है? प्रकार, उदाहरण और लाभ](https://inhindiworld.com/digital-marketing-kya-hai/): डिजिटल मार्केटिंग क्या है? प्रकार, उदाहरण और लाभ अब सभी कंपनियां अपने प्रोडक्ट को डिजिटल मार्केटिंग की मदद से ऑनलाइन मार्केटिंग करा रही है। जिमसे बहुत ही कम समय और कम लगत के साथ अच्छा मुनाफा हो जाता है। अगर हम आज से कुछ समय पहले की बात करें तो सभी कम्पनिया अपने प्रोडक्ट के विज्ञापन टीवी पर दिखते थे। जिससे की ज्यादा से ज्यादा लोग उनके प्रोडक्ट को पहचान कर खरीद सके। हालाँकि पुराने समय में कुछ विज्ञापन ऐसे भी होते थे, जो की सिर्फ बच्चो के प्रोडक्ट बेचने के लिए बनाये जाते थे, लेकिन वह सबको देखने पढ़ते थे। […] - [IPO क्या है, और इसमें कैसे निवेश करें | IPO Full Form in Hindi](https://inhindiworld.com/ipo-kya-hai-in-hindi/): IPO क्या है, और इसमें कैसे निवेश करें | IPO Full Form in Hindi IPO Kya Hai आपने शेयर मार्केट, बैंकिंग, म्यूचुअल फंड आदि के बारे में सुना होगा। लेकिन क्या आप जानते हैं कि IPO क्या है? अगर नहीं जानते तो आज इस लेख में आपको IPO क्या है से जुड़ी सारी जानकारी मिलेगी ? अगर आपने इस लेख को ध्यान से पढ़ा तो आपको IPO से जुड़े सभी सवालों के जवाब यहां मिल गए होंगे। ज्यादातर लोगों को IPO के बारे में नहीं पता होता कि IPO से पैसे कैसे कमाए जाते हैं, इसमें निवेश कैसे किया जाता है […] - [शेयर बाजार में निवेश करने से पहले क्या सावधानियां बरतनी चाहिए ?](https://inhindiworld.com/stock-market-me-nivesh-karne-se-pehle-kisi-ko-kya-savdhani-rakhni-chahiye/): शेयर बाजार में निवेश करने से पहले क्या सावधानियां बरतनी चाहिए ? शेयर बाजार में निवेश करने से पहले क्या सावधानियां बरतनी चाहिए ? आपने अक्सर देखा होगा कि कुछ लोग शेयर बाजार में निवेश करके अमीर बन जाते हैं, जबकि कुछ गरीब हो जाते हैं। ऐसा क्यों होता है, इसके पीछे क्या कारण हैं? किसी कंपनी के शेयर आम आदमी को अमीर बनाते हैं, जबकि कुछ पेनी स्टॉक आपका सारा पैसा ले लेते हैं। यह बिल्कुल सच है कि शेयर बाजार में 90% नए निवेशक कोई खबर पढ़कर या किसी की सलाह पर बिना खुद से कोई रिसर्च किए खराब […] - [ट्रेडिंग क्या है और कैसे करें | ट्रेडिंग कितने प्रकार की होती है?](https://inhindiworld.com/trading-kya-hai-aur-kese-karte-hai/): ट्रेडिंग क्या है और कैसे करें | ट्रेडिंग कितने प्रकार की होती है ? ट्रेडिंग क्या है और कैसे करें: Treding पैसे कमाने का एक बेहतरीन तरीका है। अगर आप लोग नहीं जानते Treding Kya Hai तो आपको यह आर्टिकल पूरा पढ़ना चाहिए। जिसकी मदद से आप जान सकते हैं कि ट्रेडिंग कितने प्रकार की होती है? और ट्रेडिंग से आप कैसे पैसे कमा सकते हैं। इससे जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारियों के बारे में आपको पता चलेगा। इसके बाद आपको ट्रेडिंग कैसे करें से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारियां भी मिलेंगी। आज की दुनिया में हर कोई अपनी जमा पूंजी को दोगुना […] - [Mutual Fund क्या है, और म्यूच्यूअल फण्ड में कैसे इन्वेस्ट करें?](https://inhindiworld.com/mutual-fund-kya-hai/): Mutual Fund क्या है, और म्यूच्यूअल फण्ड में कैसे इन्वेस्ट करें ? क्या आप जानते हैं कि म्यूचुअल फंड क्या है (What is Mutual Fund in Hindi) अगर नहीं, तो आज इस लेख में हम म्यूचुअल फंड क्या है (Mutual Fund Kya Hai) से जुड़े सभी महत्वपूर्ण निवेशकों के बारे में जानने वाले हैं। अगर आप अपना पैसा निवेश करना चाहते हैं, तो फंड फंड आपके लिए एक अच्छा जरिया हो सकता है। फ़्रैंचाइज़ी फंड आपको बैंक से सबसे ज्यादा पैसा वापस देता है। एक व्यापारी का मुख्य लक्ष्य पैसे को सुरक्षित किराए पर लेना होता है। और वो है नीडो […] - [Top 10 Places to Visit in Rishikesh | ऋषिकेश में घूमने की जगह](https://inhindiworld.com/top-10-places-to-visit-in-rishikesh/): Top 10 Places to Visit in Rishikesh | ऋषिकेश में घूमने की जगह ऋषिकेश में घूमने की जगह के लिए शीर्ष 10 स्थान – जब भी आप छुट्टियों में किसी ऐसे शहर में जाना चाहते हैं जो धार्मिक स्थल होने के साथ-साथ घूमने की जगह भी हो, तो आपको ऋषिकेश जरूर जाना चाहिए। ऋषिकेश उत्तराखंड राज्य के जिले यानी देहरादून में स्थित है। इस जगह का पहाड़ पूरे देहरादून में मशहूर है। यह उत्तर भारत में हिमालय की तलहटी में स्थित है। अक्सर लोग यहां अपना समय बिताने या अपने परिवार के साथ घूमने के लिए आते हैं। आपको बता दें […] - [घर पर नींबू का पेड़ लगाने के 3 तरीके](https://inhindiworld.com/nimbu-ka-ped-kaise-lagaye/): घर पर नींबू का पेड़ लगाने के 3 तरीके नींबू का पेड़ कैसे लगाएं – आज के इस लेख में हम बात करेंगे कि नींबू का पेड़ कैसे उगाएं। इसके अलावा सभी प्रकार के नींबू उगाए जाते हैं और नींबू के पेड़ की देखभाल कैसे करें। इससे जुड़ी सारी जानकारी आज आपको मिलने वाली है. मुझे पूरी उम्मीद है कि अगर आप इस आर्टिकल को पूरा पढ़ेंगे तो आपको यह जरूर पसंद आएगा। इससे पहले हम नींबू की खेती और उससे जुड़ी कुछ सामान्य जानकारी के बारे में जानेंगे। नींबू के पौष्टिक गुण एवं परिचय नींबू एक स्वास्थ्यवर्धक फल है, इसमें […] - [डीमेट अकाउंट क्या होता है, कैसे खोलें | Demat Account के फायदे](https://inhindiworld.com/demat-account-kya-hota-hai/): डीमेट अकाउंट क्या होता है, कैसे खोलें | Demat Account के फायदे बैंकों में बचत खातों के बारे में तो हम सभी जानते हैं। यह चोरी और दुरुपयोग से सुरक्षा प्रदान करते हुए हमारे धन तक आसान पहुंच की अनुमति देता है। एक डीमेट खाता निवेशकों के लिए यही काम करता है। आज के समय में स्टॉक निवेश के लिए डीमेट अकाउंट अनिवार्य है। डीमेट खाता एक ऐसा खाता है जिसका उपयोग शेयरों और प्रतिभूतियों को इलेक्ट्रॉनिक प्रारूप में रखने के लिए किया जाता है। डीमेट खाते का पूरा नाम डीमैटेरियलाइज्ड अकाउंट है। डीमेट खाता खोलने का उद्देश्य खरीदे गए या […] - [Insurance क्या होता है और यह कितने प्रकार के होते है?](https://inhindiworld.com/insurance-kya-hota-hai-hindi/): Insurance क्या होता है, और यह कितने प्रकार के होते है? Insurance क्या है? आज इस लेख में हम चर्चा करेंगे कि Insurance क्या होता है, और यह कितने प्रकार के होते है? क्या है ? और कितने प्रकार के होते हैं? हम हमारे जीवन में Insurance के महत्व और उससे जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारियों के बारे में जानेंगे। आजकल हम जो भी विज्ञापन देखते हैं उनमें से अधिकांश बीमा से संबंधित होते हैं। जिसके बाद लोग बीमा के बारे में या Insurance से जुड़ी सभी जानकारी जानने की कोशिश करते हैं। आज इस लेख में हम बीमा से जुड़े सभी […] - [माचिस का आविष्कार किसने किया और कब किया था?](https://inhindiworld.com/machis-ka-avishkar-kisne-kiya-tha/): माचिस का आविष्कार किसने किया और कब किया था? आज हम जानेंगे कि माचिस का आविष्कार किसने किया था और माचिस का आविष्कार किसने किया था माचिस का इस्तेमाल हर कोई करता है और इसके बारे में आप यह भी जानेंगे कि माचिस के आविष्कार से पहले आग जलाने का काम बहुत मुश्किल था। इसके लिए दो पत्थरों को आपस में घिसा जाता था, लेकिन माचिस के आविष्कार ने आग जलाने की प्रक्रिया को बहुत आसान बना दिया है, लेकिन अब बात आती है कि माचिस का आविष्कार किसने किया, यह अपने आप में एक बड़ा सवाल है। अगर आपको इसके […] - [Full Form of BMW in Hindi | BMW का फुल फॉर्म क्या है?](https://inhindiworld.com/bmw-full-form-in-hindi/): Full Form of BMW in Hindi | BMW का फुल फॉर्म क्या है ? BMW का फुल फॉर्म क्या है? (BMW का फुल फॉर्म हिंदी में) जानिए. अगर नहीं तो कोई बात नहीं क्योंकि आज इस लेख में BMW का मतलब क्या है? ये कंपनी कहां है, इसका मालिक कौन है और भी कई अहम और रोचक जानकारी आपको बताने जा रहे हैं। इससे पहले हम आपको बता दें कि BMW एक लग्जरी वाहन कंपनी है। जो अपनी लग्जरी कारों और हाई परफॉरमेंस बाइक्स के लिए जाना जाता है। आपने कभी न कभी BMW कार तो देखी ही होगी, अगर नहीं […] - [Information About Tiger In Hindi | बाघ के बारे में जानकारी](https://inhindiworld.com/information-about-tiger-in-hindi/): Information About Tiger In Hindi | बाघ के बारे में जानकारी इस लेख में हम बाघ के बारे में (Information About Tiger In Hindi) जानेंगे। बाघ एक खूबसूरत और खतरनाक जानवर है. यह बहुत मजबूत होता है, भोजन में मांस खाता है। बाघ एक संरक्षित पशु है, इनकी संख्या घटने की कगार पर है। बाघों की अधिकांश आबादी भारत, बांग्लादेश, रूस, थाईलैंड, इंडोनेशिया, भूटान, सुमात्रा, मलेशिया और नेपाल में है। जहां इन्हें संरक्षित करने के लिए कई राष्ट्रीय पार्क भी बनाए गए हैं। जिससे बाघों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है. बाघ के बारे में हर कोई जानना चाहता है, अपने […] - [CVV Number क्या होता है | What Is CVV in Hindi](https://inhindiworld.com/what-is-cvv-number/): CVV Number क्या है | What Is CVV in Hindi CVV Number क्या है ? (What Is CVV in Debit Card in Hindi) डेबिट कार्ड या एटीएम कार्ड में CVV नंबर का बहुत महत्व होता है। इसके बारे में जानना आपके लिए बहुत जरूरी है. इस आर्टिकल में CVV क्या है? इससे जुड़ी सारी जानकारी आपको मिल जाएगी और मुझे पूरी उम्मीद है कि अगर आपने यह आर्टिकल पूरा पढ़ लिया है तो आपको कोई और आर्टिकल पढ़ने की जरूरत नहीं पड़ेगी। जब भी आप ऑनलाइन खरीदारी करते हैं, तो आप भुगतान करने के लिए अपने एटीएम पिन का उपयोग करके, […] - [बल्ब का आविष्कार किसने किया ? | Bulb ka Avishkar Kisane Kiya ?](https://inhindiworld.com/bulb-ka-avishkar-kisane-kiya/): बल्ब का आविष्कार किसने किया ? | Bulb ka Avishkar Kisane Kiya ? बल्ब का आविष्कार किसने किया ? (Balb ka Avishkar Kisane Kiya Hindi Mai) यह बड़ा रोचक प्रश्न है। बहुत पहले, जब बल्ब नहीं थे, लोग अपने घरों को रोशन करने के लिए मोमबत्तियों और दीयों का इस्तेमाल करते थे। लेकिन मोमबत्ती से दुर्घटना होने की भी संभावना है। कभी-कभी हम घर में जलती मोमबत्ती को किसी प्लास्टिक आदि पर रख देते हैं तो उसमें आग लग जाती है। लेकिन जब से बल्ब की तकनीक आई है, तब से जीवन में प्रकाश होना बहुत आसान हो गया है। इन […] - [गौरैया चिड़िया के बारे में जानकारी | Information About Sparrow In Hindi](https://inhindiworld.com/information-about-sparrow-in-hindi/): गौरैया चिड़िया के बारे में जानकारी | Information About Sparrow In Hindi गौरैया चिड़िया के बारे में जानकारी हिंदी में – आज हम इस लेख में एक ऐसी चिड़िया के बारे में जानेंगे जो आपने अपने घर में या अपने घर के पास देखी होगी। यह पक्षी बहुत सुन्दर है। गौरैया को हिंदी में घरेलू गौरैया कहते हैं। क्योंकि यह ज्यादातर घरों के आसपास ही रहता है। हम बात कर रहे हैं स्पैरो बर्ड इन हिंदी की क्योंकि यह एक ऐसी चिड़िया है जो विलुप्त होने की कगार पर है। गौरैया चिड़िया के बारे में जानकारी | Information About Sparrow In […] - [Trademark क्या है | What Is Trademark in Hindi](https://inhindiworld.com/what-is-trademark-in-hindi/): Trademark क्या है | What Is Trademark in Hindi क्या आप जानते हैं कि ट्रेडमार्क क्या है ? यदि नहीं, तो आज इस लेख में आपको ट्रेडमार्क क्या है (What is Trademark) से संबंधित सभी महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त होने वाली है। जिसमें ट्रेडमार्क रजिस्ट्रेशन क्या है, और भी बहुत सी जानकारी इस लेख में शामिल है। ट्रेडमार्क किसी कंपनी का लोगो या नाम होता है, जिसका इस्तेमाल नकली कंपनियों से बचने के लिए किया जाता है। क्योंकि आज भी कई लोग ऐसे हैं जो असली कंपनियों का माल नकली बनाकर बेच रहे हैं. ऐसे में ट्रेडमार्क बहुत काम आता है। तो […] - [कार का आविष्कार किसने किया और कब किया था ?](https://inhindiworld.com/car-ka-avishkar-kisne-kiya-tha/): कार का आविष्कार किसने किया और कब किया था | Car Ka Avishkar Kisane Kiya Aur Kab Kiya Tha कार का अविष्कार किसने किया था – क्या आप जानते हैं कार का आविष्कार किसने और कब किया था। अगर नहीं, तो आज के इस लेख में आपको कार से जुड़ी कई अहम जानकारियां मिलेंगी। मौजूदा समय में सड़कों पर कई तरह की लग्जरी कारें दौड़ती नजर आती हैं, कुछ कारें अपनी तेज रफ्तार के लिए भी जानी जाती हैं। कभी न कभी आपके मन में यह सवाल आया होगा कि कार का आविष्कार किसने और कब किया? कार को सबसे पहले […] - [कुतुब मीनार की लम्बाई कितनी है और कहां स्थित है ?](https://inhindiworld.com/kutub-minar-ki-lambai-kitni-hai/): कुतुब मीनार की लम्बाई कितनी है और कहां स्थित है | Kutub Minar Ki Lambai Kitni Hai Aur Kha Sthit Hai  Introduction : Hello दोस्तों आज हम जानेगे कुतुब मीनार की लम्बाई कितनी है | कुतुब मीनार भारत के दिल्ली शहर में स्थित होने वाला एक प्रमुख स्मारक है, जिसे विश्व धरोहर स्थलों की सूची में भी सम्मिलित किया गया है। इस मीनार की इतिहास, विशेषताएं, और स्थान आपके इस लेख के माध्यम से जानते हैं। कुतुब मीनार की लम्बाई कितनी है ? कुतुब मीनार की लम्बाई कितनी है और कहां स्थित है ? भारत की सबसे ऊंची मीनार कुतुब मीनार […] - [स्कूटर का आविष्कार किसने किया और कब हुआ ? ](https://inhindiworld.com/scooter-ka-avishkar-kisne-kiya/): स्कूटर का आविष्कार किसने और कब किया ? स्कूटर का आविष्कार: इसका महत्व, प्रभाव और इतिहास परिचय: स्कूटर का आविष्कार कार्यक्रम आदि में बाइक और कार के साथ-साथ एक ऐसा वाहन है जो प्रतिदिन बढ़ती आबादी की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने में मदद करता है। यह सड़क पर आसानी से चलाया जा सकता है और पार्किंग की समस्या को कम करने में मदद करता है। इस लेख में हम जानेंगे कि स्कूटर का आविष्कार किसने और कब किया था। स्कूटर (स्कूटर) क्या है: स्कूटर एक मोटर चालित वाहन है जिसमें एक सवार होता है, जिसे एक या दो पहियों द्वारा […] - [डॉल्फिन मछली की जानकारी | Dolphin Information in Hindi](https://inhindiworld.com/dolphin-information-in-hindi/): डॉल्फिन मछली की जानकारी | Dolphin Information in Hindi आज के इस लेख में हम डॉल्फ़िन से जुड़े सभी तथ्य लिखने जा रहे हैं। डॉल्फिन दुनिया की दुर्लभ प्रजातियों में से एक है। इसकी सुरक्षा के लिए देश-विदेश में कई तरह के कानून बनाए गए हैं। लेकिन वह कानून डॉल्फिन के संरक्षण में फेल साबित हो रहा है। जलवायु परिवर्तन और अवैध व्यापार के लिए डॉल्फ़िन तेजी से कमजोर होते जा रहे हैं। आज के इस लेख में हम डॉल्फ़िन से जुड़े तथ्यों के बारे में बता रहे हैं। आशा है कि आपका ज्ञान और रुचि बढ़ सकती है, आपको यह […] - [Planets Name in Hindi & English – ग्रहों के नाम हिंदी और अंग्रेजी में](https://inhindiworld.com/planets-name-in-hindi-english/): Planets Name in Hindi & English – ग्रहों के नाम हिंदी और अंग्रेजी में आप सभी सौरमण्डल का नाम तो सुना होगा और आप सभी यह भी जानते होंगे कि हम सभी मनुष्य भी इसी सौर मंडल का एक हिस्सा हैं लेकिन हम सौर मंडल के एक छोटे से हिस्से में रहते हैं जिसे पृथ्वी कहते हैं। पृथ्वी भी इसी मंडल का एक हिस्सा है और इस सौर मंडल में पृथ्वी की तरह कई ग्रह हैं जिनके बारे में मैं आपको सब सौर बताने जा रहा हूं। तो दोस्तों क्या आप जानते हैं कि इस सौर मंडल में कितने ग्रह हैं, […] - [Google Mera Naam Kya Hai - गूगल मेरा नाम क्या है ?](https://inhindiworld.com/google-mera-naam-kya-hai/): गूगल मेरा नाम क्या है मेरा नाम क्या है, क्या आप भी यही सवाल गूगल से पूछना चाहते हैं। जानकारी के लिए बताएं कि Google को आपके बारे में सब पता चल जाएगा। आपके परिवार के लोग भी आपको नहीं पता होंगे कि आप पूरे दिन क्या करते हैं लेकिन Google बाबा की आपके ऊपर पूरे दिन नज़र टिकी है। आज के इस आर्टिकल में हम बात करेंगे कि Google को आपका नाम पता है या नहीं? आपको क्या लगता है पता होगा या नहीं? ज्यादा मत सोचिये इसका सामान्य सा जवाब है Google को आपका नाम आसानी से मिल जाता […] - [मोटरसाइकिल का आविष्कार किसने किया और कब किया था ?](https://inhindiworld.com/motorcycle-ka-avishkar-kisne-kiya-or-kb-kiya/): मोटरसाइकिल का आविष्कार किसने किया और कब किया था ? नमस्कार दोस्तों, बाइक हमारे जीवन का एक अभिन्न अंग बन गया है। आज के समय में बाइक के कारण हमारे कई काम आसान हो जाते हैं. लेकिन अक्सर हम सभी के मन में एक सवाल आता है कि बाइक का आविष्कार किसने किया। तो आज के इस लेख में हम इसी प्रश्न का उत्तर जानेंगे। अगर आप भी जानना चाहते हैं कि बाइक का आविष्कार किसने किया था और बाइक से जुड़ी अन्य जानकारी हासिल करना चाहते हैं तो हमारे साथ इस आर्टिकल में अंत तक बने रहें। चलिए, शुरू करते […] - [दुनिया के सात अजूबे के नाम और फोटो Seven Wonders of the World in Hindi 2024](https://inhindiworld.com/duniya-ke-saat-ajoobe-ke-naam/): आज हम एक ऐसे विषय के बारे में जानेंगे जो बहुत ही रोमांचक है। इस लेख में हम जानेंगे दुनिया के सात अजूबों के बारे में। क्‍योंकि आज भी कई ऐसे लोग हैं, जिन्‍हें दुनिया के सात अजूबों का नाम अभी तक नहीं पता है कुछ लोग इन अजूबों के नाम तो जानते हैं, लेकिन इनके बारे में पूरा इतिहास नहीं जानते हैं। हेरोडोटस और कैलिमैचस पहले थे जिन्होंने दुनिया के अजूबों का चयन करने का फैसला किया। दुनिया के सात अजूबों की पहली सूची दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व के आसपास जारी की गई थी। इसे देखते हुए साल 2000 में […] - [1 दिन में 20000 रुपया कैसे कमाएं ?](https://inhindiworld.com/1-din-me-20000-kaise-kamaye/): 1 दिन में 20000 रुपया कैसे कमाएं ? 1 दिन में 20000 कैसे कमाएं ?- दोस्तों आजकल हर व्यक्ति ज्यादा से ज्यादा पैसा कमाने के बारे में सोचता है वो भी कम से कम समय में लेकिन पैसा कमाने में मेहनत और समय दोनों लगता है। कुछ लोग नौकरीपेशा हैं और कुछ का अपना व्यवसाय है, लेकिन जिस तरह से बढ़ती महंगाई के साथ लोगों के खर्चे हर दिन बढ़ रहे हैं, वे जो कमाते हैं वह उनकी जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं है। इसलिए अब लोग ज्यादा से ज्यादा पैसा कमाने के बारे में सोचते रहते हैं। […] - [मुस्लिम विधि के क्या स्रोत है कानून के स्रोत के रूप में इज्मा के महत्व](https://inhindiworld.com/muslim-vidhi-ke-kya-srot-hai-vidhi-ke-srot-ke-roop-mein-ijma-ke-mahatv-par-charchakre/): मुस्लिम विधि के क्या स्रोत हैं ? विधि के स्रोत के रूप में इज्मा के महत्व की विवेचना कीजिए ।  (What are the various sources of Muslim Law ? Discuss the importance of ljma as a source of law.) मुस्लिम विधि के स्रोत (Sources of Mulism Law) मुस्लिम विधि के स्रोत- मुस्लिम विधि एक धार्मिक विधि है। मुस्लिम विधि इस्लाम के सिद्धान्तों के अतिरिक्त और कुछ नहीं है। आज भी मुस्लिम विधि के अंतर्गत कुछ ऐसे सिद्धान्त (Theories) हैं जिन्हें सभ्य समाज स्वीकार करने में हिचकिचाहट महसूस करता है। मुस्लिम विधि केवल तकरीवन 1400 वर्ष पुरानी है। पैगंबर मोहम्मद साहब के माध्यम […] - [निम्नलिखित पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए संभाव्य उत्तराधिकार, |](https://inhindiworld.com/sambhavy-uttaradhikar-apratibadh-day-saprati-badh-day-gotras-sapind-samanodak-bandhu/): निम्नलिखित पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए | ( 1 )सम्भाव्य उत्तराधिकार ,  ( 2 ) अप्रतिबद्ध दाय , ( 3 ) सप्रति बद्ध दाय ,  ( 4 ) गोत्रस सपिण्ड ,   ( 5 ) समानोदाक , ( 6 ) बन्धु । Write short notes on the following ( 1 ) Spes succession , ( 2 ) Unobstructed Heritage , ( 3 ) Obstructed Heritage , ( 4 ) Gortraj Sapinda , ( 5 ) Samanodakos  ( 6 ) Bandus. सम्भाव्य उत्तराधिकार – ( Spes Successions ) – सम्भाव्य उत्तराधिकार से हमारा अभिप्राय उत्तराधिकार के अवसर से है जो एक व्यक्ति को प्राप्त […] - [दाय कभी प्रसुप्तावस्था में नहीं होता है । इस कथन की व्याख्या कीजिए](https://inhindiworld.com/day-kabhi-prasupt-avastha-mein-nahi-hota-hai-is-kathan-ki-vyakhya-kijie/): दाय कभी प्रसुप्तावस्था में नहीं होता है । इस कथन की व्याख्या कीजिए और कोई अपवाद हो तो बताइये । (  Day never happens in dormancy. Explain this statement and point out any exceptions. ) दाय कभी प्रसुप्तावस्था में नहीं होता है । इस कथन का तात्पर्य यह है कि कोई भी सम्पत्ति का एक क्षण के लिए बिना स्वामी के नहीं रह सकती जैसे ही सम्पत्ति के स्वामी की मृत्यु होती है वैसे ही सम्पत्ति उसके उत्तराधिकारियों में निहित हो जाती है । हिन्दू विधि में तो सम्पत्ति उसी वस्तु को कहते हैं जिनका कोई – न – कोई स्वामी […] - [मिताक्षरा विधि के अनुसार उत्तराधिकार का मूल सिद्धान्त क्या है ?](https://inhindiworld.com/mitakshara-vidhi-ke-anusar-uttaradhikar-ka-mul-siddhant-kya-hai/): मिताक्षरा विधि के अनुसार उत्तराधिकार का मूल सिद्धान्त क्या है ? मिताक्षरा के अनुसार उत्तराधिकार की कितनी श्रेणी मान्य हैं , जिनमें उत्तराधिकार के हेतु एक दूसरे को प्राथमिकता दी जाती है ? मिताक्षरा तथा दायभाग में उत्तराधिकार के अन्तर को स्पष्ट कीजिए । What is the govening factor inheritance according to Mitakashra Law ? How many clauses of heirs are recognise according to Mitakshara in order of preference to each other ? Point out the distinction between M Mitakashara and Dayabhage Law of inheritance . मिताक्षरा विधि के अनुसार , उत्तराधिकार का मूल सिद्धान्त संगोत्रता है । मनु ने भी […] - [प्रतिनिधित्व के सिद्धान्त की व्याख्या और माँ के गर्भ में स्थित बालक के अधिकार](https://inhindiworld.com/pratinidhitv-ke-sidhant-ki-vyakhya-aur-man-ke-garbh-mein-sthit-balak-ke-adhikar/): प्रतिनिधित्व के सिद्धान्त की व्याख्या कीजिए । इस सिद्धान्त का अधिनियम पर क्या प्रभाव पड़ता है ? ( Explain the doctrine of Representation . What is the effect of the Act on doctrine ? ) प्रतिनिधित्व का सिद्धान्त ( Doctrine of representation ) – प्रतिनिधित्व के सिद्धान्त से हमारा अभिप्राय है पुत्र , पौत्र जिसका पिता मर चुका है , तथा प्रपौत्र जिसका पिता तथा पितामह मर चुका है , सभी एक होकर पैतृक पूर्वजों को स्वर्जित तथा पृथक् सम्पत्ति को एक साथ उत्तराधिकार में प्राप्त करते हैं । ” अतः जहाँ किसी व्यक्ति को पिता तथा पितामह मर चुका है […] - [उत्तराधिकार सम्बन्धी सामान्य नियम](https://inhindiworld.com/uttaradhikar-sambandhi-samany-niyam/): हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम , 1956 में उत्तराधिकार के सम्बन्ध में जिन साधारण उपबन्धों का उल्लेख किया गया है , उनको बताइये । State the general provision relation to the succession as provided in the Hindu Succession Act , 1956 . उत्तराधिकार सम्बन्धी सामान्य नियम ( General provision relating to succession ) – हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम , 1956 की धारा 18 से 28 तक उत्तराधिकार सम्बन्धी सामान्य नियम वर्णित किये गये हैं जो कि निम्नलिखित हैं ( 1 ) पूर्णरक्त उत्तराधिकारियों को अर्द्ध – रक्त सम्बन्धी उत्तराधिकारियों पर अधिमान्य प्राप्त है— धारा 18 के अनुसार , यदि किसी निर्वसीयत के दायदों का […] - [हिन्दू स्त्री की सम्पत्ति के उत्तराधिकार के सामान्य नियम क्या हैं ?](https://inhindiworld.com/hindu-stree-ki-sampati-ke-uttaraadhikar-ke-saamany-niyam-kya-hain/): हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम , 1956 के अन्तर्गत एक हिन्दू स्त्री की सम्पत्ति के उत्तराधिकार के सामान्य नियम क्या हैं ? ( What are the general rules of Succession to the Property of a Hindu Female under the Hindu Succession Act , 1956 ? ) हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम , 1956 के पूर्व एक हिन्दू स्त्री दो प्रकार की सम्पत्ति रखती थी- ( 1 ) स्त्री धन , ( 2 ) हिन्दू नारी सम्पदा । स्त्री धन के ऊपर स्त्री का पूर्ण स्वामित्व होता था और उसकी मृत्यु के बाद वह सम्पत्ति उसके वारिसों को चली जाती थी । नारी सम्पदा की वह […] - [सम्पत्ति का व्ययन किस प्रकार होगा ?](https://inhindiworld.com/sampatti-ka-vyayan-kis-prakar-hoga/): निम्न मामलों में सम्पत्ति का व्ययन किस प्रकार होगा ? ( अ ) ‘ अ ‘ एक मात्रा दो विधवाएँ , तीन पुत्रों तथा तीन पुत्रियों को छोड़कर मरता है | ( ब ) ‘ अ ‘ एक विधवा ‘ ब ‘ , एक पुत्र ‘ च ‘ तथा पूर्वमृत पुत्र ‘ च ‘ के तीन पुत्र ‘ क ‘ , ‘ ख ‘ ,  ‘ ग ‘ पुत्री ‘ त ‘ तथा पूर्वमृत पुत्री ‘ य ‘ की दो पुत्रियों को छोड़कर मरता है | How will the undivided interest in the following cases devalue ? (a) ‘A’ dies leaving […] - [पुरुषों के सम्बन्ध में उत्तराधिकार के सामान्य नियम की व्याख्या |](https://inhindiworld.com/purushon-ke-sambandh-mein-uttaradhikar-ke-samany-niyam-ki-vyakhya-kre/): पुरुषों के सम्बन्ध में उत्तराधिकार के सामान्य नियम की व्याख्या कीजिए तथा उदाहरण दीजिए । ( Describe the general rules of succession in the case of males , Give illustrations . ) हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम की धारा 8 से 13 में पुरुषों के उत्तराधिकार सम्बन्धी नियमों का वर्णन किया गया है । हिन्दू उत्तराधिकार – धारा 8 में उत्तराधिकार के वे सामान्य नियम दिये गये हैं जो कि पुरुष के द्वारा निर्वसीयती निजी सम्पत्ति छोड़कर मरने पर लागू होते हैं । यह धारा किसी पुरुष के पृथक् अथवा स्वर्जित सम्पत्ति में न्यागमन की व्याख्या करती है । इस प्रकार इस धारा […] - [संबंधो के अर्थ और परिभाषाएं | सपिण्ड, बन्धु, सगा, सौतेला |](https://inhindiworld.com/sambandho-ke-arth-aur-paribhaashaen-sapind-bandhu-saga-sautela/): निम्नलिखित पदों की हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम , 1956 के  सम्बन्ध में परिभाषा कीजिए तथा उनका अर्थ भी बताइए | ( 1 ) सपिण्ड ( 2 ) बन्धु , ( 3 ) सगा , ( 4 ) सौतेला , ( 5 ) सहोदर , ( 6 ) उत्तराधिकारी , ( 7 ) बिना वसीयत , ( 8 ) सम्बन्धी ( 9 ) अलीयसन्तान विधि , ( 10 ) मरूमक्कटायम विधि ( 11 ) नम्बूदरी विधि । Define the following terms in relation to the Hindu Succession Act , 1956 and show the purpose of them – ( 1 ) Agnate , ( […] - [उत्तराधिकार सम्बन्धी नियमों में किये गये मुख्य परिवर्तनों का उल्लेख कीजिए](https://inhindiworld.com/ek-bache-aur-vrdh-mata-pita-ko-poshan-pane-ka-uttaradhikar-sambandhi-niyam/): हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम 1956 द्वारा उत्तराधिकार सम्बन्धी नियमों में किये गये मुख्य परिवर्तनों का उल्लेख कीजिए । अथवा हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम 1956 की प्रमुख विशेषताओं का वर्णन कीजिए । ( Discuss the main changes brought about by the Hindu Succession Act , 1956 in the Law of inheritage . Or Discuss the main features of Hindu Succession Act , 1956 )  हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम 1956 ने उत्तराधिकारी के सम्बन्ध में एक क्रान्तिकारी विचारधारा को जन्म दिया है । यद्यपि इससे पूर्व न्यायालय के निर्णयों के माध्यम से पूर्व हिन्दू विधि में परिवर्तन होते रहे हैं फिर भी हिन्दू उत्तराधिकार की वर्तमान […] - [भरण-पोषण की धनराशि कौन निश्चित करता है](https://inhindiworld.com/bharan-poshan-ki-dhanarashi-kon-nishchit-karata-h/): भरण-पोषण की धनराशि कौन निश्चित करता है और किन सिद्धान्तों के आधार पर यह निर्धारित की जाती है ? ( Who determines the amount of maintenance and on what principles is it determined ? )  भरण-पोषण की धनराशि ( Amount of Maintenance ) – हिन्दू दत्तक ग्रहण तथा भरण – पोषण अधिनियम , 1956 की धारा 23 ने पोषण की धनराशि निर्धारित करने का सर्वोपरि अधिकार न्यायालय को दे रखा है । प्रत्येक मामले के तथ्यों पर विचार करके और उसकी विशेष परिस्थितियों का अध्ययन करके भरण – पोषण दिलाने का निश्चय करना और उसकी राशि निर्धारित करना न्यायालय का कर्तव्य […] - [भरण-पोषण सम्बंधित नियम की व्याख्या कीजिए](https://inhindiworld.com/bharan-poshan-samnibhandit-niyam-ki-vyaakhya-kijie/): हिन्दू दत्तक ग्रहण तथा भरण – पोषण अधिनियम के अन्तर्गत भरण – पोषण के प्रयोजन के लिये कौन व्यक्ति आश्रित है तथा इनके पोषण सम्बन्धी नियम की व्याख्या कीजिए ।  ( Who are dependents “ For the Purpose of maintenance under the . Hindu Adoption and Maintenance Act and also discuss the Provision of – Maintenance of these persons ) भरण-पोषण सम्बंधित नियम ( Bharan – Poshan Sambandhit Niyam ) भरण-पोषण सम्बंधित नियम – हिन्दू दत्तक ग्रहण तथा भरण – पोषण अधिनियम , 1956 की धारा 21 में उन व्यक्तियों की सूची दी गई है जो भरण – पोषण के प्रयोजन […] - [भरण-पोषण अधिनियम मै एक बच्चे तथा वृद्ध माता-पिता को पोषण पाने का अधिकार](https://inhindiworld.com/bharan-poshan-adhiniyam-me-ek-bachche-tatha-vridh-mata-pita-ko-poshan-pane-ka-adhikar-hai/): क्या हिन्दू दत्तक ग्रहण एवं भरण-पोषण अधिनियम के अन्तर्गत एक बच्चे तथा वृद्ध माता – पिता को पोषण पाने का अधिकार है तथा विशुद्ध हिन्दू विधि के अन्तर्गत क्या अधिकार प्राप्त थे ? ( What is the right of maintenance of children and aged parents under pure Hindu the Hindu Adoptions and Maintenance Act and under the Law ? ) भरण-पोषण अधिनियम के अन्तर्गत- वृद्ध माता – पिता तथा सन्तान के भरण-पोषण का अधिकार – हिन्दू दत्तक एवं भरण-पोषण अधिनियम की धारा 20 के अन्तर्गत वृद्ध माता – पिता तथा सन्तानों के भरण-पोषण का अधिकार प्रदान किया है । यह धारा […] - [किन परिस्थितियों में हिन्दू विधवा पुत्र वधू भरण-पोषण की हकदार होती है ?](https://inhindiworld.com/kin-paristhitiyon-mein-hindu-vidhwa-putr-vadhu-bharan-poshan-ki-hakadar-hoti-hai/): किन परिस्थितियों में हिन्दू विधवा पृथक् भरण – पोषण की हकदार होती है ? ( Under what circumstances is a Hindu Widow entitled to separate maintenance ? ) विधवा पुत्र वधू- प्राचीन विधि के अनुसार विधवा पुत्र – वधू को भरण – पोषण देना श्वसुर का न विधिक दायित्व है और न व्यक्तिगत । यह केवल एक नैतिक दायित्व है । अधिनियम की धारा 19 में पुत्र – वधू के भरण – पोषण के बारे में कहा गया है , किन्तु वह श्वसुर के दायित्व में को व्यक्तिगत दायित्व नहीं बनाती । जैसा कि मु . रूपा बनाम ग्रियावती के बाद […] - [भरण-पोषण शब्द से आप क्या समझते हैं ? ](https://inhindiworld.com/bharan-poshan-shabd-se-aap-kya-samajhte-hain/): भरण-पोषण शब्द से आप क्या समझते हैं ? ( What do you understand by the term maintenance ? ) भरण-पोषण क्या है— सामान्यतः हिन्दू विधि में भरण-पोषण को वृहद् रूप लिया गया है और उसके अन्तर्गत भोजन , वस्त्र , आवास , शिक्षा और चिकित्सीय परिचर्या के लिये उपलब्ध खर्चे आते हैं । अविवाहित पुत्री की दशा में उसके विवाह के युक्ति – युक्त प्रासंगिक व्यय भी आते हैं । “ Maintenance is a right to necessities which are resonable , e.g. food ; clothing and shelter by a person from another . भरण-पोषण का अधिकार संयुक्त परिवार , के सिद्धान्त […] - [दत्तक ग्रहण के क्या परिणाम हैं ?](https://inhindiworld.com/dattak-grahan-ke-kya-parinam-hai-in-hindi/): दत्तक ग्रहण के क्या परिणाम हैं ? What are the effect of Adoption ? दत्तक ग्रहण के परिणाम ( Effect of Adoption ) – प्राचीन विधि के अनुसार दत्तक पुत्र अपने नैसर्गिक परिवार से स्थानान्तरित होकर दत्तक ग्रहीता परिवार में आ जाता है .वह दत्तक ग्रहीता परिवार के सदस्यों का सपिण्ड हो जाता है और उसकी दत्तक प्रहीता माता के पूर्वज उसके मातृ पक्षीय पुरखे होते हैं । प्रिची कौंसिल ने प्रताप सिंह बनाम अमर सिंह के मामले में यह मत व्यक्त किया है कि “ दत्तक पुत्र की स्थिति दुत्तक ग्रहीता के औरस पुत्र की होती है । वह दत्तक […] - [हिन्दू विधि के अन्तर्गत एक वैध गोद हेतु क्या - क्या आवश्यकताएँ हैं ?](https://inhindiworld.com/hindu-vidhi-ke-antargat-ek-vaidh-god-hetu-kya-kya-aavashyakataen-hain/): हिन्दू विधि के अन्तर्गत एक वैध गोद हेतु क्या – क्या आवश्यकताएँ हैं ? What are the essentials of a valid adoption under Hindu Law ?  दत्तक ग्रहण ( Adoption ) – मनु के अनुसार “ दत्तक ग्रहण ( Adoption ) किसी पुत्र के अभाव में एक व्यक्ति द्वारा किया जाता है । दत्तक ग्रहण ( Adoption )  से हमारा अभिप्राय है ” किसी पुत्र को उसके माता – पिता के घर से दत्तक ग्रहण ( Adoption ) करने वाले व्यक्ति के घर में उसके पुत्र के रूप में नियोज करना है जिसके अनुसार यह समझा जाता है कि दत्तक ग्रहण […] - [वस्तुतः संरक्षक और तदर्श संरक्षक](https://inhindiworld.com/vastutah-sanrakshak-aur-adarsh-sanrakshak/): वस्तुतः संरक्षक और तदर्श संरक्षक De – facto Guardian , and  Ad hoc Guardian   वस्तुतः संरक्षक ( De – facto Guardian ) – वस्तुतः संरक्षक स्वयं द्वारा नियुक्त रक्षक होता है । जब कोई व्यक्ति बिना किसी विधि की आवश्यकता के अवयस्क के शरीर या सम्पत्ति की देखभाल करता है और यह देखभाल कुछ दिन की अस्थायी देखभाल होकर स्थायी देखभाल है तो हिन्दू विधि ऐसे व्यक्ति की स्थिति को स्वीकार करती है । इस प्रकार ” अवयस्क का वस्तुतः संरक्षक न कोई विधिक संरक्षक है न कोई वसीयती संरक्षक तथा न किसी न्यायालय द्वारा नियुक्त संरक्षक है वरन् वह इस […] - [वसीयती संरक्षक की नियुक्ति के सम्बन्ध में क्या प्रावधान किये गए हैं](https://inhindiworld.com/vasiyat-sanrakshak-ki-niyukti/): हिन्दू अवयस्कता और संरक्षक अधिनियम के अन्तर्गत वसीयती संरक्षक की नियुक्ति के सम्बन्ध में क्या प्रावधान किये गये हैं ? ऐसे संरक्षक की क्या शक्तियाँ हैं ? ( What are the provisions of the Hindu Minority and Guardianship act for appointment of a Guardian under a will ? What are the powers of such a guardian ? ) वसीयती संरक्षक ( Testamentary Guardian ) – पिता अथवा माता द्वारा अपनी अवयस्क सन्तान के शरीर अथवा सम्पत्ति अथवा दोनों के लिए वसीयत में नियुक्त किये  गये संरक्षक को ‘ वसीयती संरक्षक ‘ कहते हैं । वसीयती संरक्षक से तात्पर्य “ उन संरक्षकों […] - [प्रकृति अथवा नैसर्गिक संरक्षक की शक्तियाँ ?](https://inhindiworld.com/prakritik-tatha-naisargik-sanrakshak-ki-shaktiyan/): प्रकृति अथवा नैसर्गिक संरक्षक की शक्तियाँ ( Powers of a natural guardian ) प्रकृति अथवा नैसर्गिक संरक्षक – अधिनियम की धारा 8 में अवयस्क के शरीर तथा सम्पत्ति के सम्बन्ध में  प्राकृतिक संरक्षक की शक्तियों की विवेचना की गई है । धारा 8 इस प्रकार है ( 1 ) हिन्दू अवयस्क का प्राकृतिक संरक्षक इस धारा के प्रावधानों के अधीन रहते हुए • ऐसे समस्त कार्यों को कर सकता है जो उस अवयस्क के लाभ के लिए अथवा उसकी सम्पदा के उगाहने , संरक्षण या फायदे के लिए आवश्यक या युक्तियुक्त और उचित हो , किन्तु संरक्षक किसी भी दशा में […] - [अवयस्क, संरक्षक तथा एक हिन्दू अवयस्क के प्राकृतिक संरक्षक की परिभाषा बताइए](https://inhindiworld.com/avayask-sanrakshak-tatha-ek-hindu-avayask-ke-prakritik-sanrakshak-kee-paribhaasha-bataie/): अवयस्क , संरक्षक तथा एक हिन्दू अवयस्क के प्राकृतिक संरक्षक की परिभाषा बताइए | Define the terms Minor , Guardian and Natural Guardian. अवयस्क ( Minor ) – हिन्दू अवयस्क एवं संरक्षक अधिनियम 1956 की धारा 4 के अन्तर्गत अवयस्क की परिभाषा इस प्रकार दी गयी है — “ अवयस्क का तात्पर्य उन व्यक्तियों से होगा जिन्होंने 18 वर्ष की आयु पूरी नहीं की है । अतः इस अधिनियम के अन्तर्गत वे सभी व्यक्ति जिन्होंने 18 वर्ष की आयु पूर्ण नहीं की है , अवयस्क कहलायेंगे । अधिनियम के द्वारा उल्लिखित नियम विवाह को छोड़कर अवयस्कता तथा संरक्षकता सम्बन्धी सभी मामलों […] - [शून्यकरणीय विवाह | Write an essay on voidable marriage](https://inhindiworld.com/write-an-essay-on-voidable-marriage/): शून्यकरणीय विवाह पर एक निबन्ध लिखिए । Write an essay on voidable marriage. शून्यकरणीय विवाह विधि मान्य विवाह है । जब तक कि उसके शून्यकरणीय होने की डिक्री पारित न कर दी जाये वह वैध और अमान्य रहता है । शून्यकरणीय विवाह जब तक शून्यकरणीय घोषित नहीं हो जाता तब तक उसके अन्तर्गत विधि मान्य विवाह की सब परिस्थितियाँ और सब अधिकार , कर्त्तव्य और दायित्वं जन्म लेते हैं । ऐसे विवाह से उत्पन्न सन्तान धर्मज होती है । हिन्दू विवाह अधिनियम की धारा 12 शून्यकरणीय विवाह के सम्बन्ध में उपबन्धित है । इस धारा के अनुसार , ” कोई भी […] - [1955 के अन्तर्गत किन आधारों पर न्यायालय से तलाक की डिक्री पति और पत्नी द्वारा प्राप्त की जा सकती है](https://inhindiworld.com/1955-ke-antargat-kin-aadharon-par-nyayalay-se-talak-ki-dikree-pati-aur-patni-dvara-prapt-ki-ja-sakati-hai/): हिन्दू विवाह अधिनियम , 1955 के अन्तर्गत किन आधारों पर न्यायालय से तलाक की डिक्री पति और पत्नी द्वारा प्राप्त की जा सकती है | On what grounds Court may pass decree for divorce under Hindu Marriage Act , 1955 तलाक ( Divorce ) – हिन्दू विधि में विवाह – विच्छेद का कोई प्रावधान नहीं था क्योंकि विवाह एक आवश्यक संस्कार माना जाता था परन्तु वर्तमान हिन्दू विधि ( हिन्दू विवाह अधिनियम , 1955 ) ने तलाक के सम्बन्ध में क्रान्तिकारी परिवर्तन कर दिया है । अधिनियम की धारा 13 में उन परिस्थितियों का वर्णन किया गया है जिनके आधार पर […] - [अभित्याग का अर्थ | Abhityag Ka Arth Hindi](https://inhindiworld.com/abhityag-ka-arth-in-hindi/): अभित्याग ( Descrtion in Hindi )  अभित्याग ( Descrtion ) – अभित्याग की सबसे संक्षिप्त परिभाषा इस प्रकार है “ जब एक पक्षकार दूसरे पक्षकार को अकारण ही बिना दूसरे की सहमति से स्थायी रूप से त्याग या परित्याग कर देता है  तो यह अभित्याग कहलाता है । लाभ कौर बनाम नारायण सिंह के बाद में न्यायालय द्वारा यह निर्णीत किया गया है कि ” अभित्याग का अर्थ विवाह के दूसरे पक्षकार का आशय स्थायी रूप से त्याग देना तथा उसके साथ निवास छोड़ देने का है जो कि बिना उसकी स्वीकृति तथा युक्तियुक्त कारण के होता है । यह वैवाहिक […] - [न्यायिक पृथक्करण क्या है](https://inhindiworld.com/nyayik-prithakkaran-kya-hai-in-hindi/): न्यायिक पृथक्करण ( Judicial separation ) न्यायिक पृथक्करण ( Judicial separation ) – अधिनियम की धारा 10 न्यायिक पृथक्करण का अनुतोष कुछ निश्चित परिस्थितियों में प्रदान किया गया है । यह अनुतोष विवाह के दोनों पक्षकारों को प्राप्त है , अर्थात् पति – पत्नी दोनों इसके लिए याचिका प्रस्तुत कर सकते हैं । हिन्दू विवाह अधिनियम की धारा 10 ( 1 ) में यह उपबन्धित किया गया है कि “ विवाह पक्षकारों में से कोई पक्षकार चाहे वह विवाह इस अधिनियम के प्रारम्भ के पूर्व अनुष्ठापित हुआ हो चाहे पश्चात् , जिला न्यायालय की धारा 13 की उपधारा ( 1 ) […] - [दाम्पत्य अधिकारों का पुनर्स्थापन](https://inhindiworld.com/dampatya-adhikaron-ki-punarsthapna-kya-hai-in-hindi/): दाम्पत्य अधिकारों का पुनर्स्थापन ( Restitution of Conjugal Rights ) दाम्पत्य अधिकारों का पुनर्स्थापन ( Restitution of Conjugal Rights ) – हिन्दू विवाह अधिनियम 1955 की धारा 9 के अन्तर्गत दाम्पत्य अधिकार की पुनर्स्थापना का प्रावधान किया गया है । दाम्पत्य कर्त्तव्यों में सर्वप्रथम एवं महत्वपूर्ण कर्त्तव्य दम्पत्ति का परस्पर एक – दूसरे को साहचर्य प्रदान करना है क्योंकि हिन्दू विवाह का उद्देश्य दाम्पत्य जीवन की सुख एवं सुविधा से सम्बन्धित है । विवाह के पक्षकारों को एक – दूसरे के साथ सहवास करने का अधिकार है । यदि एक पक्ष दूसरे पक्ष को इस अधिकार से वंचित किया जाता हैं […] - [हिन्दू विवाह अधिनियम , 1955 के द्वारा एक वैध विवाह के लिये कौन - सी अनिवार्य शर्तें निर्धारित की गई हैं ? ](https://inhindiworld.com/hindu-vivah-adhiniyam-1955-ke-dwara-ek-vaidh-vivah-ke-liye-kaun-se-anivary-sharten-nirdharit-ki-gayi-hain/): हिन्दू विवाह अधिनियम , 1955 के द्वारा एक वैध विवाह के लिये कौन – सी अनिवार्य शर्तें निर्धारित की गई हैं ?  वैध विवाह के लिए अनिवार्य शर्तें ( Compulsory conditions for a valid marriage ) – हिन्दू विवाह अधिनियम , 1955 की धारा 5 के अन्तर्गत एक वैध विवाह के लिए निम्नलिखित शर्तें निर्धारित की गई हैं ( 1 ) एक विवाह- धारा 5 ( i ) के अनुसार , ” विवाह के समय दोनों पक्षकारों में से न तो वर की कोई जीवित पत्नी हो और न वधू का कोई जीवित पति हो । ” इस धारा 5 ( […] - [विवाह की परिभाषा कीजिए](https://inhindiworld.com/vivha-ki-paribhasha-kijye-in-hindi/): विवाह की परिभाषा कीजिए । प्राचीनकाल में जो विभिन्न विवाह की पद्धतियाँ प्रचलित थीं , उनकी विवेचना कीजिए । Define Marriage . Discuss the various kinds of marriage that were previlent in ancient India. विवाह की परिभाषा कीजिए – विवाह की परिभाषा – रघुनन्दन ने विवाह की परिभाषा इस प्रकार दी है , ” वर के द्वारा कन्या को स्त्री रूप में ग्रहण करने की स्वीकृति विवाह है । ” वस्तु हिन्दू धर्म में कन्या विवाह की पक्षकार नहीं होती । पक्षकारं कन्या का पिता तथा वर होता है , जिसको दान में कन्या दी जाती है । हिन्दू विधि में […] - [हिन्दू विवाह अधिनियम,1955 द्वारा इसमें क्या परिवर्तन किये गये हैं](https://inhindiworld.com/hindu-vivah-adhiniyam1955-dhara-isme-kya-parivartan-kiye-gaye-hain/): हिन्दू विवाह अधिनियम , 1955 द्वारा इसमें क्या परिवर्तन किये गये हैं ? विस्तृत रूप से समझाइए । What changes have been made in this by the Hindu Marriage Act, 1955? Explain in detail. हिन्दू विधि में विवाह को एक महत्वपूर्ण संस्कार माना गया है । सम्भवतः संसार में विवाह का इतना आदर्शीकरण हिन्दुओं के अतिरिक्त अन्य किसी जाति ने नहीं किया है । ऋग्वेद के पितृसत्ता युग में भी विवाह को संस्कार ही माना जाता था और हिन्दुओं के इतिहास में विवाह को सदैव संस्कार ही माना गया है । स्टेजी के अनुसार ” विश्व में किसी भी समाज द्वारा […] - [शैवायत तथा महन्त से आप क्या समझते हैं उसके क्या अधिकार तथा कर्तव्य हैं](https://inhindiworld.com/shikayat-tatha-mahant-se-aap-kya-samajhte-hain-iske-kya-adhikar-tatha-kartavya-hain-in-hindi/): आप शैवायत तथा महन्त से क्या समझते हैं ? उसके क्या अधिकार तथा कर्तव्य हैं ? क्या महन्त के पंद का अन्तरण हो सकता है ? विवेचना कीजिए । What do you understand by Shavayat and Mahant ? What are their rights and duties ? Can the office of Mahant be alternated ? Discuss. शैवायत– साधारणतया विन्यास संस्थापित करते समय संस्थापक शैवायत की नियुक्ति करता है । शैवायत के कर्त्तव्य और दायितव उस व्यक्ति के कर्त्तव्य और दायित्व हैं जो धार्मिक और आध्यात्मिक पद का धारक है । इस तरह शैवायती में दो बातें निहित हैं देय का सेवक और देय […] - [धर्मदाय से आप क्या समझते हैं ?](https://inhindiworld.com/dharmaday-se-aap-kya-samajhte-hain-in-hindi/): धर्मदाय से आप क्या समझते हैं ? वैध – विन्यास के आवश्यक तत्व क्या हैं ? समझाइए । धर्मदाय ( Religious Endowments ) – यह सर्वविदित है कि हिन्दू अतिशय धार्मिक व्यक्ति होते हैं । हिन्दुओं में धार्मिक प्रयोजनों के लिये दान इसलिए दिया जाता है कि प्राणी स्वर्ग प्राप्त करे । अति प्राचीनकाल से हिन्दुओं में दान देने की प्रथा रही है । शायद ही संसार का ऐसा कोई देश होगा जहाँ भारतवर्ष के आदर्श मन्दिर , मस्जिद ज्यादा पाये जाते हैं । कश्मीर से कन्याकुमारी के बीच यदि भ्रमण करें तो पायेंगे कि एक से बढ़कर एक भव्य और […] - [अव्यावहारिक ऋण, पूर्ववर्ती ऋण, दादूपत का नियम](https://inhindiworld.com/vyavaharik-rn-purvavarti-rn-dadupat-ka-niyam-in-hindi/): निम्नलिखित पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए ( 1 ) अव्यावहारिक ऋण , ( 2 ) पूर्ववर्ती ऋण , ( 3 ) दादूपत का नियम । Write short notes on the following( 1 ) Avygavharik debt , ( 2 ) Antecedent debt , ( 3 ) Rule of Damdupat ( 1 ) अव्यावहारिक ऋण ( Avyavharik debt ) – अव्यावहारिक ऋण से हमारा अभिप्राय उस ऋण से है जो विधि विरुद्ध तथा अनैतिक कार्यों के लिए लिया जाता है । मनु के अनुसार , “ प्रतिभू होने से दिया जाने वाला वृथा दान ( व्यंग्य विनोद में किसी को देने के लिए कहा […] - ['पुनीत कर्त्तव्य पद' को लीडिंग केस की सहायता से समझाइये](https://inhindiworld.com/puneet-kartavya-pad-ko-leeding-kes-ki-sahayata-se-samajhaiye-in-hindi/): ‘पुनीत कर्त्तव्य पद’ को लीडिंग केस की सहायता से समझाइये तथा यह भी लिखिए कि पुत्र द्वारा पिता के ऋणों को चुकाने के लिये संयुक्त पारिवार की सम्पत्ति को निःशेषित करने की शक्ति और उक्त पुनीत कर्त्तव्य में क्या सम्बन्ध है ? ‘पुनीत कर्त्तव्य पद’- पुत्र द्वारा पिता के ऋणों को चुकाने के लिए पुनीत कर्त्तव्य और पिता द्वारा पूर्ववर्ती ऋणों को चुकाने के लिए संयुक्त परिवार की सम्पत्ति निःशेष करने की शक्ति में क्या संम्बन्ध है ? पिता के ऋणों को चुकाने का पुत्र का पुनीत कर्त्तव्य है । इस प्रख्यात सिद्धान्त की “ उत्पत्ति स्मृतियों से हुई है । […] - [इच्छा-पत्र ( वसीयत ) क्या है ? और मृत्यु शैय्या दान के बारे में आप क्या जानते हैं](https://inhindiworld.com/ichchha-patr-vasiyat-kya-hai-aur-mrutyu-shaiya-daan-ke-baare-mein-aap-kya-jaanate-hain/): इच्छा-पत्र ( वसीयत ) क्या है ? वसीयत करने के लिए कौन सक्षम है और कौनसी सम्पत्तियाँ इच्छापत्र द्वारा उत्तरदान की जा सकती हैं ? इच्छा-पत्र के सम्बन्ध में क्या सामान्य नियम हैं ? इच्छा-पत्र ( वसीयत ) – इच्छा-पत्र किसी व्यक्ति को लिखित अपना मौखिक घोषणा जिसके द्वारा अपनी सम्पत्ति आदि की मृत्यु के बाद व्यवस्था की इच्छा प्रकट करता है । भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम की धारा 3 में इच्छा-पत्र की परिभाषा दी गयी है । इच्छा-पत्र तथा दान लगभग एक ही हैं केवल दोनों में भेद यह है कि दान जीवनकाल में कार्यान्वित हो जाता है जबकि इच्छा-पत्र जीवनकाल […] - [नारी सम्पदा से आप क्या समझते हैं ?](https://inhindiworld.com/nari-sampada-se-aap-kya-samajhate-hain-in-hindi/): नारी सम्पदा से आप क्या समझते हैं ? समझाइये । हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम 1956 ने इस सम्बन्ध में कौन – से परिवर्तन किये हैं ? नारी सम्पदा ( Woman Estate ) – नारी सम्पदा को स्थिर सम्पदा तथा सीमित सम्पदा के नाम से भी पुकारा जाता है । यह वह सम्पत्ति है जिसे नारी किसी पुरुष या स्त्री से दाय में प्राप्त करती है अथवा विभाजन के समय प्राप्त करती है । यह सम्पत्ति केवल उसे उसके जीवन काल में उपभोग के लिए प्राप्त होती है । वह इसका अन्तरण केवल कुछ ही निर्धारित परिस्थितियों में कर सकती है । उसकी […] - [किसी स्त्री के उसकी स्त्री - धन सम्पत्ति पर क्या अधिकार है ?](https://inhindiworld.com/kisi-stri-ke-uske-stri-dhan-sampati-par-kya-adhikar-hai-in-hindi/): किसी स्त्री के उसकी स्त्री – धन सम्पत्ति पर क्या अधिकार है ? What are the rights of women over her Stridhan Property ?  स्त्री – धन के ऊपर स्त्री के अधिकार को उसकी प्रस्थिति के अनुसार निर्धारित किया जाता है । ( 1 ) अविवाहितावस्था कोई भी स्त्री जो अविवाहित है तथा वयस्क है अपनी सम्पत्ति को किसी को भी हस्तान्तरण कर सकती है परन्तु यदि वह अवयस्क है तो वह अपनी सम्पत्ति का हस्तान्तरण नहीं कर सकती है ( 2 ) विवाहितावस्था – विवाहितावस्था में स्त्री अपनी सौदायिक धन अर्थात् पिता व भाई द्वारा प्राप्त धन का निर्वतन पति […] - [स्त्रीधन से आप क्या समझते हैं ? स्त्रीधन कितने प्रकार के होते हैं ?](https://inhindiworld.com/stridhan-se-aap-kya-samajhate-hain-in-hindi/): स्त्रीधन से आप क्या समझते हैं ? स्त्रीधन कितने प्रकार के होते हैं ? What do you understand by Stridhan ? What are the kinds of Stridhan ?  स्त्री – धन ( Stridhan ) – हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम , 1956 के पारित होने के पूर्व किसी स्त्री के पास दो प्रकार की सम्पत्ति हो सकती थी— ( 1 ) वह सम्पत्ति जिस पर उसका पूर्ण स्वामित्व होता था ,  ( 2 ) ऐसी सम्पत्ति जिस पर सीमित स्वामित्व होता था । प्रथम को स्त्रीधन तथा दूसरे को नारी सम्पदा कहा जाता था । स्त्री धन का अर्थ- स्त्री धन शब्द से […] - [पुनः एकीकरण की परिभाषा बताइये तथा इसके क्या प्रभाव होते हैं ?](https://inhindiworld.com/punah-ekikaran-ki-paribhasha-bataiye-tatha-iske-kya-prabhav-hote-hain-in-hindi/): पुनः एकीकरण की परिभाषा बताइये तथा इसके क्या प्रभाव होते हैं ? किसमें पुनः संयोजन हो सकता है ? Give the definition of reintegration and what are its effects? What can recombine? पुनः एकीकरण की परिभाषा – विभाजन के बाद यदि पृथक् हुए सदस्य पुनः एक साथ संयुक्त रूप से रा प्रारम्भ कर देते हैं तो इन्हें पुनः एकीकरण कहा जाता है । मिताक्षरा , दायभाग तथा मद्रास शाखा के मतों के अनुसार यदि किसी संयुक्त परिवार का कोई सदस्य पृथक् हो गया है तो वह केवल , पिता , भाई अथवा चाचा के साथ ही पुनः एकीकरण कर सकता है […] - [विभाजन में हिस्से के विवरण के क्या नियम हैं ?](https://inhindiworld.com/vibhajan-mein-hisse-ka-vivaran-ke-kya-niyam-hai-in-hindi/): विभाजन में हिस्से के विवरण के क्या नियम हैं ? What are the rules for allotment of shares in partition ? सामान्य नियम के अनुसार , विभाजन पृथक्करण के दिन की तद्व्यवस्था के अनुसार होना चाहिए अर्थात् विभाजन संयुक्त परिवार की व्यवस्था के अनुसार होना चाहिए । विभाजन निम्न नियमों के अनुसार किये जाते हैं ( 1 ) पिता और पुत्र के बीच विभाजन – जब किसी पिता और पुत्र के बीच विभाजन होता है तो पुत्र पिता के बराबर भाग लेता है । उदाहरणार्थ एक सहभागी सम्पत्ति के सदस्य हैं पिता तथा चार पुत्र । प्रत्येक सम्पत्ति का 1/5 भाग […] - [हिन्दू विधि की मिताक्षरा शाखा के अन्तर्गत कौन - सी सम्पत्तियाँ बँटवारे के योग्य हैं ?](https://inhindiworld.com/hindu-vidhi-ki-mitakshara-shakha-ke-antargat-kaun-si-sampatiyan-bantavare-ke-yogy-hain/): हिन्दू विधि की मिताक्षरा शाखा के अन्तर्गत कौन – सी सम्पत्तियाँ बँटवारे के योग्य हैं ? किन व्यक्तियों के कहने पर विभाजन हो सकता है ? बँटवारे में विभाजनीय सम्पत्ति – बँटवारा उसी सम्पत्ति का होता है जो परिवार के सदस्यों द्वारा बँटवारे के पूर्व अविभक्त सम्पत्ति के रूप में धारण की गई है । परिवार के सदस्यों की पृथक सम्पत्ति का बँटवारा नहीं होता है ।  कुछ ऐसे प्रकार की सम्पत्तियाँ भी होती हैं जो अपने स्वरूप के कारण अविभाजित मानी जाती हैं । मनु के अनुसार , पोशाक , सवारी , आभूषण , पका पकाया भोजन , पत्नी , […] - [मिताक्षरा हिन्दू विधि के अन्तर्गत विभाजन का क्या अभिप्राय है ?](https://inhindiworld.com/mitakshara-hindu-vidhi-ke-antargat-vibhajan-ka-kya-abhipray-hai/): मिताक्षरा हिन्दू विधि के अन्तर्गत विभाजन का क्या अभिप्राय है ? विभाजन का अर्थ – मिताक्षरा विधि के अनुसार विभाजन के दो विशिष्ट अर्थ होते हैं— ( 1 )  पारिवारिक सम्पत्ति के विभिन्न सदस्यों के अनिश्चित हितों को निर्दिष्ट अंशों में समायोजन करना ।  संयुक्त प्रास्थिति का पृथक्करण तथा उसके विधिक परिणाम ।  जतरू प्रधान बनाम अम्बिका जो . के वाद में विभाजन की परिभाषा इस प्रकार दी गई . ” संयुक्त परिवार की सम्पत्ति में सहदायिकी के चल हितों का निर्दिष्ट भागों में स्फुटन ( Crystalisation ) । ” मयूख के अनुसार , “ विभाजन केवल एक प्रकार की मनः […] - [एक संयुक्त परिवार के कर्त्ता की शक्तियों की विवेचना कीजिए ।](https://inhindiworld.com/ek-sanyukt-parivar-ke-karta-ki-shaktiyon-ki-vivechana-kijie/): एक संयुक्त परिवार के कर्त्ता की शक्तियों की विवेचना कीजिए । कर्ता ( प्रबन्धक ) – अविभाजित परिवार की सम्पत्ति की व्यवस्था तथ देखभाल एवं परिवार का संचालन जिस व्यक्ति द्वारा किया जाता है । वह कर्त्ता कहलाता है । साधारणत : हिन्दुओं में परिवार का कर्त्ता पिता होता है , यदि वह जीवित है । हिन्दू विधि की यह उपधारणा है कि ज्येष्ठ सहदायिक संयुक्त परिवार का कर्त्ता होता है । ज्येष्ठ सहदायिक कर्त्ता का पद अपनी ज्येष्ठता के आधार पर प्राप्त करता है न कि अन्य सहदायिकों की सर्व – सम्पत्ति से । जब तक यह जीवित है कर्त्ता […] - [एक सहदायिक के अधिकारों की विवेचना कीजिए](https://inhindiworld.com/ek-sahadayik-ke-adhikaron-ki-vivechana-kijie-in-hindi/): एक सहदायिक के अधिकारों की विवेचना कीजिए  सहदायिक के अधिकार ( Rigths of the Copercenner ) – सहदायिक सम्पत्ति में सहदायिकों के अग्रलिखित अधिकार हैं ( 1 ) जन्मना अधिकार – सहदायिकी सम्पत्ति में एक सहदायिक जन्म से अधिकार प्राप्त करता है और पुत्र द्वारा इस प्रकार प्राप्त किया गया हित अपने पिता के हित के बराबर होता है । सहदायिकी सम्पत्ति में प्रत्येक सहदायिक का जन्मना अधिकार होने का कारण यह है कि वह किसी अन्य सहदायिकों द्वारा सहदायिक की सम्पत्ति के सम्बन्ध में दिये गये किसी अनुचित अथवा विधि – विरुद्ध , विधवा संयुक्त हित या उपभोग के लिए […] - [सहदायिकी सम्पत्ति, पृथक् सम्पत्ति और पैतृक सम्पत्ति में सम्बन्ध](https://inhindiworld.com/sahadayiki-sampatti-pruthak-sampatti-aur-paitrik-sampatti-mein-sambandh-in-hidi/): सहदायिकी सम्पत्ति, पृथक् सम्पत्ति तथा पैतृक सम्पत्ति के सम्बन्ध में संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए। सहदायिकी सम्पत्ति-सहदायिकी सम्पत्ति को संयुक्तं परिवार की सम्पत्ति भी कहा जाता है। सहदायिकी सम्पत्ति वह होती है जिसमें सहदायकी का हक जन्मत होता है तथा उन्हें सम्पत्ति का बँटवारा करने का तथा उत्तरजीविता का अधिकार होता है। सहदायिकी सम्पत्ति  में निम्नलिखित सम्मिलित हैं- (1) पैतृक सम्पत्ति, (2) संयुक्त परिवार के सदस्य द्वारा संयुक्त रूप से अर्जित की गई सम्पत्ति, (3) सदस्यों की पृथक सम्पत्ति में जो पृथक् कोष में डाल दी गई है, (4) वह सम्पत्ति जो सभी सदस्यों द्वारा अथवा किसी सहभागी द्वारा संयुक्त परिवार के कोष […] - [हिन्दू सहदायिकी तथा संयुक्त हिन्दू परिवार में क्या अन्तर है ?](https://inhindiworld.com/sanyukt-hindu-parivaar-aur-sahadayik-mein-kya-antar-hai-in-hindi/): हिन्दू सहदायिकी तथा संयुक्त हिन्दू परिवार में क्या अन्तर है ? मिताक्षरा विधि के अन्तर्गत संयुक्त हिन्दू परिवार – हिन्दुओं में परिवार प्राचीन और सर्वाधिक महत्वपूर्ण मानव संस्था है । किसी भी मनुष्य की सामाजिक तथा मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण से विकास संयुक्त परिवार द्वारा ही होता है । आदि प्राचीनकाल से ही हिन्दू संयुक्त परिवार में रहने के अभ्यस्त थे । हिन्दुओं के अनुसार व्यक्ति नहीं बल्कि परिवार समाज की है । एक संयुक्त और अविभक्त परिवार ही हिन्दू समाज की सामान्य स्थिति है । संयुक्त परिवार की परिभाषा में वे सभी व्यक्ति आते हैं जिनसे परिवार निर्मित होता है वास्तव में […] - [मिताक्षरा और दायभाग में अंतर](https://inhindiworld.com/mitakshara-aur-dayabhaga-shaakhaon-mein-kya-antar-hai-in-hindi/): मिताक्षरा तथा दायभाग शाखाओं में क्या अंतर है । मिताक्षरा और दायभाग -मूल रूप से हिन्दू विधि की दो शाखाएँ हैं- प्रथम मिताक्षरा तथा दूसरा दायभाग । इन दोनों पद्धतियों में पर्याप्त विभिन्नता है । एक तो वे लोग हैं जो मिताक्षरा का अनुगमन करते हैं तथा दूसरे वह हैं जो दायभाग का अनुगमन करते हैं । मिताक्षरा मिताक्षरा इसको कट्टर पंथ कहा जाता है मिताक्षरा बंगाल को छोड़कर सारे भारतवर्ष में सर्वोच्च प्रमाण के रूप में मान्य है । इसमें सम्पत्ति का अधिकार जन्म से होता है । पुत्र पिता के साथ सह- स्वामी होता है । सम्पत्ति का अधिकार […] - [हिन्दू विधि की शाखाएँ](https://inhindiworld.com/hindu-vidhi-ki-shakhayen-in-hindi/): हिन्दू विधि की शाखाएँ | Schools of Hindu Law हिन्दू विधि की शाखाएँ – मूल रूप से हिन्दू विधि की दो शाखायें हैं — प्रथम मिताक्षरा तथा दूसरी दायभाग । मिताक्षरा विज्ञानेश्वर द्वारा लिखित भाष्य है जो ग्यारहवीं शताब्दी में की गई याज्ञवल्क्य स्मृति की व्याख्या है । दायभाग किसी संहिता विशेष पर आधारित नहीं है वरन् सभी संहिताओं का निबन्ध होने का दावा करता है । दायभाग जीमूतवाहन की कृति है । दायभाग के सिद्धान्त बंगाल में प्रचलित हैं तथा मिताक्षरा के सिद्धान्त भारत के अन्य भागों में बंगाल के अतिरिक्त समस्त भारत में मिताक्षरा सबसे अधिक मान्य ग्रन्थ है […] - [हिन्दू विधि के स्रोत | Source of Hindu Law](https://inhindiworld.com/hindu-vidhi-ke-strot-in-hindi-sources-of-hindu-law/): हिन्दू विधि के स्रोत | Source of Hindu Law  हिन्दू विधि के स्रोत -Sources of Hindu Law – प्राचीन मत के अनुसार विधि एवं धर्म में एक अभिन्न सम्बन्ध था तथा विधि धर्म का ही एक अंग मानी जाती थी । धर्म के स्रोत ही विधि के स्रोत माने जाते थे । मनु के अनुसार वेद , स्मृति , सदाचार एवं जो अपने को तुष्टिकरण लगे , ये चार धर्म के स्पष्ट लक्षण माने गये थे । याज्ञवल्क्य ने भी धर्म के चार आधार स्तम्भ इस प्रकार बतलाये हैं— श्रुति , स्मृति , सदाचार , जो अपने को प्रिय लगे तथा […] - [ह्यूनसांग कौन था | Hyoonasaang Kaun Tha](https://inhindiworld.com/hyoonasaang-kaun-tha/): ह्यूनसांग कौन था | Hyoonasaang Kaun Tha ह्यूनसांग का वृत्तान्त – ह्यूनसांग एक चीनी यात्री था , जो हर्षवर्धन के शासनकाल में भारत आया था । उसे ‘ युआन च्वांग ‘ के नाम से भी पुकारा जाता है । इतिहासकार उसे यात्रियों में राजकुमार मानते हैं । उसका जन्म 600 ई ० में चीन के होनान फू नामक नगर में हुआ था । 20 वर्ष की आयु में वह बौद्ध भिक्षु बना । बौद्ध भिक्षु बनने के पश्चात् उसने बौद्ध तीर्थ स्थानों की यात्रा करने तथा बौद्ध साहित्य का अध्ययन करने के उद्देश्य से भारत की ओर प्रस्थान किया । वह […] - [हर्षवर्धन में समुद्रगुप्त तथा अशोक दोनों के ही कुछ गुण विद्यमान् थे](https://inhindiworld.com/harshvardhan-mein-samudragupt-aur-ashok-donon-ke-kuchh-gun-the-in-hindi/): हर्षवर्धन में समुद्रगुप्त तथा अशोक दोनों के ही कुछ गुण विद्यमान् थे | Harshavardhan Mein Samudragupt Aur Ashok Donon Ke Kuch Gun The हर्षवर्धन उत्तरी भारत का एक प्रतापी शासक था । वह एक महान् योद्धा होने के साथ – साथ धर्म – परायण तथा साहित्य – स्नेही सम्राट् भी था । उसकी सफलताओं के सूक्ष्म निरीक्षण से यूं प्रतीत होता है , मानो वह अशोक तथा समुद्रगुप्त के जीवन का मिश्रण हो । अशोक ने अपने जीवन में युद्ध तो किया , परन्तु उसकी महानता धर्म प्रचार में निहित थी । समुद्रगुप्त विद्वान् तथा कला – प्रेमी तो था , […] - [हर्षवर्धन का स्वरूप](https://inhindiworld.com/harshvardhan-ka-svaroop-in-hindi/): हर्षवर्धन का स्वरूप | Harshavardhan Ka Svaroop  हर्षवर्धन का स्वरूप– प्राचीन भारत के इतिहास में सर्वगुण सम्पन्न शासकों के उदाहरण बहुत ही कम मिलते हैं । अधिकतर शासकों में किसी न किसी पक्ष से कमी अवश्य विद्यमान् थी , चाहे वह मानवीय पक्ष से रही हो अथवा सैनिक पक्ष से अथवा शासकीय पक्ष से । परन्तु हर्षवर्धन एक महान् विजेता , एक आदर्श शासक तथा एक सहिष्णु मानव माना जाता है । उसकी तुलना अशोक , समुद्रगुप्त एवं सम्राट् अकबर से की जाती है । उसके चरित्र एवं सफलताओं का चित्र यूं खींचा जा सकता है मनुष्य के रूप में -As […] - [हर्षवर्धन का धर्म](https://inhindiworld.com/harshvardhan-ka-dharm-in-hindi/): हर्षवर्धन का धर्म , साहित्य तथा शिक्षा का संरक्षण | Harshavardhan Ka Dharm , Saahity Tatha Shiksha Ko Sanrakshan 1. धर्म को संरक्षण -Patronage to Religion- हर्षवर्धन आरम्भ में हिन्दू धर्म का अनुयायी था । वह शिव तथा सूर्य की उपासना करता था । परन्तु दिवाकर नामक बौद्ध भिक्षु के प्रभाव में आकर वह बौद्ध धर्म की हीनयान शाखा में विश्वास रखने लगा । तत्पश्चात् वह ह्यूनसांग के सम्पर्क में आया । उससे प्रभावित होकर वह बौद्ध धर्म की महायान शाखा का अनुयायी बन गया । शीघ्र ही हर्ष ने इसे संरक्षण भी प्रदान किया तथा इसके प्रचार के लिए विशेष पग […] - [हर्षवर्धन का प्रशासन  ](https://inhindiworld.com/harshavardhan-ka-prashasan-kesa-tha-in-hindi/): हर्षवर्धन का प्रशासन | Harshavardhan Ka Prashaasan हर्षवर्धन का प्रशासन – हर्षवर्धन ने एक महान् साम्राज्य की ही स्थापना नहीं कि अपितु एक कुशल शासन प्रबन्ध की भी व्यवस्था की । यह व्यवस्था अत्यन्त ही उच्च कोटि की थी । हर्षवर्धन के प्रशासन की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित थीं— I. केन्द्रीय प्रशासन -Central Administration 1. राजा -The King – केन्द्रीय प्रशासन में राजा सर्व प्रमुख था । वह राज्य का सर्वोच्च अधिकारी होता था । उसकी शक्तियां असीम थीं । वह राज्य के कर्मचारियों को नियुक्त करता था तथा जब चाहे उन्हें पद से हटा सकता था । उसे युद्ध एवं सन्धि करने […] - [हषवर्धन का जीवन एवं विजय](https://inhindiworld.com/hashavardhan-ka-jeevan-aur-vijay-in-hindi/): हषवर्धन का जीवन एवं विजय | Hashavardhan Ka Jeevan Evan Vijay   I. आरम्भिक जीवन -Early Life  हषवर्धन का जीवन एवं विजय- आरम्भिक जीवन- छोटा गुप्त साम्राज्य के पतन के पश्चात् उत्तर भारत के राजनीतिक पतन का जो दौर आरम्भ हुआ था , वो हर्षवर्धन के सिंहासन पर विराजमान होते ही थम गया । अपनी उपलब्धियों के कारण हर्षवर्धन ने इतिहास में अपना नाम अशोक एवं समुद्रगुप्त की भान्ति सदैव के लिए अमर कर दिया । हर्षवर्धन थानेश्वर के शासक प्रभाकर वर्धन का पुत्र था । उसका जन्म 4 जून , 590 ई ० को हुआ था । उसकी माता का […] - [गुप्त काल को भारतीय इतिहास का स्वर्ण युग क्यों कहा जाता है ?](https://inhindiworld.com/gupt-kal-ko-bharateya-itihaas-ka-swrn-yug-kyon-kaha-jata-hai-in-hindi/): गुप्त काल को भारतीय इतिहास का स्वर्ण युग क्यों कहा जाता है ? | Gupt Kaal Ko Bhaarateey Itihaas Ka Svarn Yug Kyon Kaha Jaata Hai ? भारतीय इतिहास का स्वर्ण युग -Golden Age of Indian History भारतीय इतिहास का स्वर्ण युग स्वर्ण युग- से हमारा अभिप्राय उस युग से है जिसमें जीवन का हर क्षेत्र चरम सीमा को छूता हुआ दिखाई देता है । ऐसे युग में लोग हर पक्ष से समृद्ध होते हैं । सामाजिक स्वरूप नवीन आदर्श लिए हुए होता है , साहित्य तथा कलाएं विकास करती हैं । देश एकता के सूत्र में बंधा होता है की […] - [गुप्तकालीन विज्ञान](https://inhindiworld.com/guptkaalen-vigyan-in-hindi/): गुप्तकालीन विज्ञान-Guptakaaleen Vigyaan   1 विज्ञान तथा तकनॉलोजी -Science and Technology गुप्तकालीन विज्ञान- गुप्त काल में कला और साहित्य की प्रगति के साथ – साथ विज्ञान और तकनॉलोजी के क्षेत्र में भी अभूतपूर्व प्रगति हुई । इस काल में गणित , ज्योतिष , चिकित्सा तथा तकनॉलोजी के क्षेत्र में नवीन आविष्कार हुए । भारतीय वैज्ञानिकों ने विश्व को नवीन सिद्धान्त दिये जिनसे विश्व अनभिज्ञ था । गुप्त काल में विज्ञान की विभिन्न शाखाओं में योगदान देने वाले वैज्ञानिकों में आर्यभट्ट , वराहमिहिर , ब्रह्मगुप्त तथा वाणभट्ट प्रमुख हैं । गुप्त काल में गणित , ज्योतिष , चिकित्सा तथा तकनॉलोजी के क्षेत्र […] - [गुप्तकालीन साहित्य](https://inhindiworld.com/gupt-kal-ke-sahityik-pragati-ka-vivaran-kre-in-hindi/): गुप्त काल की साहित्यिक सम्बन्धी प्रगति का वर्णन – Gupt Kaal Kee Saahityik Pragati Ka Vivaran साहित्य और दर्शनशास्त्र -Literature and Philosophy  गुप्तकालीन साहित्य- गुप्त सम्राटों ने साहित्य को हर सम्भव संरक्षण प्रदान किया । परिणामस्वरूप गुप्त काल में साहित्य के क्षेत्र में अभूतपूर्व उन्नति हुई । गुप्त काल में राजभाषा संस्कृत थी अतैव अधिकांश साहित्य की रचना संस्कृत भाषा में हुई । गुप्त काल को संस्कृत भाषा एवं साहित्य का स्वर्ण काल भी कहा जाता है । गुप्त काल में अनेक कवियों , नाटककारों , गद्य – लेखकों , दार्शनिकों , वैज्ञानिकों आदि ने अमर कृतियों की रचना की । […] - [गुप्त शासकों के द्वारा कला तथा भवन निर्माण](https://inhindiworld.com/gupt-shasako-ke-duvara-kala-tatha-bhavan-nirman-in-hindi/): गुप्त शासकों के द्वारा कला तथा भवन निर्माण कला का विकास | Gupt Shaasakon Dvaara Kala Aur Bhavan Kala Ka Vikaas   गुप्त काल अपनी कला के लिए चिरकाल तक स्मरण किया जाता रहेगा । गुप्त सम्राटों के अधीन कला के विभिन्न क्षेत्रों जैसे वास्तुकला , मूर्तिकला , चित्रकला , संगीतकला तथा मुद्रा निर्माण कला में अद्वितीय प्रगति हुई । परिणामस्वरूप गुप्त काल को प्राचीन भारतीय इतिहास का स्वर्ण युग कहा जाता है । गुप्त कला की सबसे महत्त्वपू बात यह थी कि यह पूर्णतः भारतीय थी । डॉ ० वी ० एस ० अग्रवाल के अनुसार , ” गुप्त काल […] - [गुप्त प्रशासन](https://inhindiworld.com/gupt-prashasan-in-hindi/): गुप्त प्रशासन | Gupta Administration गुप्त प्रशासन का विस्तृत विवरण दें । गुप्त शासकों ने न केवल एक विस्तृत साम्राज्य की स्थापना की अपितु एक उच्च कोटि की शासन व्यवस्था भी स्थापित की । गुप्त शासकों के प्रशासन का मुख्य उद्देश्य अपनी प्रजा की भलाई करना था । गुप्त प्रशासन के कुशल होने के कारण साम्राज्य में चारों ओर खुशहाली थी । गुप्त काल में आए चीनी यात्री फाहियान ने इसकी शासन व्यवस्था की बहुत प्रशंसा की है । गुप्त काल की शासन व्यवस्था की जानकारी के हमारे प्रमुख स्रोत फाहियान का वृत्तान्त , कालिदास के ग्रन्थ , कामन्दक की नीतिसार […] - [गुप्त काल के लोगों के सामाजिक , आर्थिक तथा धार्मिक जीवन](https://inhindiworld.com/gupt-kal-ke-logon-ke-samaajik-aarthik-tatha-dharmik-jeevan-kesa-tha-in-hindi/): गुप्त काल के लोगों के सामाजिक , आर्थिक तथा धार्मिक जीवन | Gupt Kaal Ke Logon Ke Saamaajik , Aarthik Tatha Dhaarmik Jeevan- गुप्तकालीन समाज एक निखरा हुआ रूप लिए हुआ था । इस युग में लोगों के सामाजिक जीवन में एक नवस्फूर्ति का संचार हुआ और इसे एक नई दिशा मिली । आर्थिक क्षेत्र में व्यापार की दशा उन्नत थी । उद्योग विकसित थे । लोग समृद्ध तथा धन – धान्य से प रिपूर्ण थे । गुप्त काल में हिन्दू धर्म का समुद्र फिर से ठाठें मारने लगा था । इसके अतिरिक्त बौद्ध धर्म तथा जैन धर्म भी समाज में […] - [गुप्त साम्राज्य का पतन](https://inhindiworld.com/gupt-samrajya-ka-patan-in-hindi/): गुप्त साम्राज्य का पतन | Gupt Saamraajy Ka Patan गुप्त शासकों ने 275 ई ० से लेकर लगभग 550 ई ० तक शासन किया । गुप्त वंश ने समुद्रगुप्त , चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य , स्कन्दगुप्त जैसे प्रतापी राजाओं को जन्म दिया । उन्होंने जहां विजयों द्वारा साम्राज्य का विस्तार किया , वहां कुशल शासन प्रबन्ध की भी व्यवस्था की । परन्तु बाद के गुप्त राजा इस महान् साम्राज्य को सम्भालने में असमर्थ रहे । परिणामस्वरूप गुप्त साम्राज्य छिन्न – भिन्न हो गया । प्रसिद्ध इतिहासकार डॉ ० आर ० सी ० मजूमदार का मानना है कि गुप्त साम्राज्य के पतन के लिए […] - [हूण कौन थे , हूण आक्रमण, हूणों के भारत पर आक्रमण](https://inhindiworld.com/hoon-kaun-the-hun-aakraman-hoon-ke-bharat-par-aakraman-in-hindi/): हूण कौन थे ? | Hoon Kaun The ? हूण -The Hunas –हूण मध्य एशिया की रहने वाली एक असभ्य , लड़ाकू तथा निर्दयी जाति थी । हूण लोग चीन देश की सी मा पर रहते थे । इन लोगों को बंजर भूमि , प्रतिकूल जलवायु , जनसंख्या में वृद्धि तथा चीनी साम्राज्य के विस्तार के कारण अपने देश को छोड़ना पड़ा । ये लोग अपने देश को छोड़ते समय दो भागों में विभाजित हो गए । हूणों का एक भाग यूरोप की ओर रवाना हुआ और वहां के पूर्वी तथा मध्य भागों में बस गया । ये ‘ काले हण ‘ […] ## Pages - [Web Stories](https://inhindiworld.com/web-stories/):                     Web Stories   - [Terms and Conditions](https://inhindiworld.com/terms-and-conditions/): Terms and Conditions Please read these Terms of Use carefully before using the https://inhindiworld.com website (the “Service”) operated by In Hindi World Your access to and use of the Service is conditioned on your acceptance of and compliance with these Terms. 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